परिचय
क्या आपने कभी सोचा कि समय और अंतरिक्ष क्या हैं और ये कैसे काम करते हैं? ये दो ऐसी चीज़ें हैं जो हमारे वजूद को परिभाषित करती हैं, लेकिन इनका रहस्य आज भी पूरी तरह नहीं खुला। कुरान और साइंस दोनों इन सवालों पर अपनी-अपनी रोशनी डालते हैं, और हैरानी की बात यह है कि उनकी बातें एक-दूसरे से मिलती हैं। इस ब्लॉग में हम समय और अंतरिक्ष के बारे में जानेंगे, जिसमें मशहूर साइंटिस्ट्स जैसे अल्बर्ट आइंस्टीन और स्टीफन हॉकिंग की खोजें और साल भी शामिल होंगे। क्या समय और अंतरिक्ष का कोई अंत है? चलिए इस रहस्यमयी सफर पर चलते हैं!
कुरान में समय और अंतरिक्ष
कुरान समय और अंतरिक्ष को अल्लाह की कुदरत और उसकी बनाई व्यवस्था से जोड़ता है। सूरह अल-हज (22:47) में लिखा है:
“और वे तुमसे जल्दी सज़ा मांगते हैं, हालाँकि अल्लाह अपने वादे के खिलाफ नहीं जाता। तुम्हारे रब के पास एक दिन तुम्हारी गिनती के हज़ार साल के बराबर है।”
यह आयत समय की सापेक्षता (relativity) की ओर इशारा करती है—एक दिन अल्लाह के लिए हज़ार साल जैसा हो सकता है। सूरह अल-मु’मिनून (23:112-113) में भी समय का ज़िक्र है:
“उसने कहा, ‘तुम धरती पर कितने साल रहे?’ वे बोले, ‘हम एक दिन या उससे कम रहे।’”
कुरान अंतरिक्ष को “आसमान” कहता है, जो फैल रहा है और व्यवस्थित है। क्या साइंस इसे समझा सकती है?
साइंस में समय और अंतरिक्ष
साइंस समय और अंतरिक्ष को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ मानती है, जिसे स्पेस-टाइम कहते हैं। इसकी नींव रखी अल्बर्ट आइंस्टीन (Albert Einstein) ने। 1915 में आइंस्टीन ने अपनी “Theory of General Relativity” में बताया कि समय और अंतरिक्ष स्थिर नहीं हैं—ये गुरुत्वाकर्षण और गति से प्रभावित होते हैं।
- समय की सापेक्षता: समय हर जगह एक जैसा नहीं चलता। तेज़ गति या भारी गुरुत्वाकर्षण में यह धीमा हो सकता है।
- स्टीफन हॉकिंग (Stephen Hawking): 1988 में अपनी किताब “A Brief History of Time” में हॉकिंग ने अंतरिक्ष और समय को ब्रह्मांड की शुरुआत से जोड़ा।
जॉन व्हीलर (John Wheeler) ने 1957 में स्पेस-टाइम को एक लचीली संरचना बताया, जो कुरान के “फैलने” और “लपेटने” से मिलता-जुलता है। साइंस कहती है कि समय और अंतरिक्ष बिग बैंग (13.8 अरब साल पहले) से शुरू हुए—क्या यह कुरान से मेल खाता है?

कुरान और साइंस का कनेक्शन
कुरान ने 1400 साल पहले समय की सापेक्षता और अंतरिक्ष की विशालता का ज़िक्र किया, जिसे आइंस्टीन (1915) और हॉकिंग (1988) ने बाद में वैज्ञानिक रूप से समझाया। “एक दिन हज़ार साल के बराबर” और साइंस की टाइम डायलेशन (time dilation) में कितनी समानता है! जॉन व्हीलर (1957) का स्पेस-टाइम कुरान के “आसमान को फैलाने” से जुड़ता है। क्या यह संभव है कि कुरान और साइंस एक ही सच्चाई को अलग-अलग तरीके से बता रहे हों?
निष्कर्ष
समय और अंतरिक्ष का रहस्य कुरान में अल्लाह की कुदरत और साइंस में ब्रह्मांड की संरचना से जुड़ा है। आइंस्टीन (1915), हॉकिंग (1988), और व्हीलर (1957) ने इसे वैज्ञानिक नज़र से देखा, लेकिन कुरान ने पहले ही संकेत दे दिए थे। अगली बार घड़ी देखें, तो सोचें—यह समय कहाँ से आया और कहाँ जा रहा है? अपने विचार कमेंट में बताएँ!
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हम अगली बार पृथ्वी और उसके चमत्कारों पर कुरान और साइंस की राय जानेंगे। इसे मिस न करें!